दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली के बारे में जानिए सभी जानकारियाँ

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जानिए दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली के बारे में

दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली- हमारी पृथ्वी पर अनगिनत जीव पाए जाते है। इन जीवों में कुछ जीव तो बहुत सूक्षम होते है लेकिन कुछ बहुत विशालकाय। विशालकाय जीवों की बात करे तो किसी समय में हमारी पृथ्वी पर डायनासोर जैसे जीव पाए जाते थे। जो आकार में इतने विशाल होते थे, जिनके अवशेष देखकर लगता है जैसे मानों विशाल पर्वत जिंदा होकर पृथ्वी पर घूम रहे हैं। इनमें Argentinosaurus प्रमुख था, जो आकार में लगभग 130 फीट लंबा और 70 फीट ऊँचा था तथा इसका वजन 100-110 टन के बीच में था। जो वाकई बहुत विशालकाय है।

उस समय पृथ्वी पर छिपकलियों की बात करें तो Spinosaurus उस काल की सबसे विशालकाय छिपकली थी। जो आकार में लगभग 15 फीट ऊंची और 50-60 फीट लंबी थी। इस छिपकली का वजन लगभग 6400-7500 किलोग्राम था। लेकिन वक्त के साथ यह सभी दानव हमारी पृथ्वी से विलुप्त हो गए। लेकिन क्या आप बता सकते है आज के समय में हमारी पृथ्वी पर दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली कौनसी है?

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दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली का नाम

आज के समय में पृथ्वी पर जो सबसे बड़ी छिपकली पाई जाती है वो डायनासोर काल की छिपकली (Spinosaurus) जितनी विशालकाय तो नहीं है लेकिन इनका आकार फिर भी बहुत बड़ा है। यह आज के समय में धरती पर पाई जाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली है। तो इस छिपकली का नाम है “कोमोडो ड्रैगन।” इसका नाम इसके डरावने स्वरूप को प्रदर्शित करता है। वैज्ञानिकों ने इसका आकार विशालकाय होने के कारण इसे ड्रैगन नाम दिया।

कोमोडो ड्रैगन का आकार

कोमोडो ड्रैगन आकार में 10 फीट तक लंबी हो सकती है व इनका वजन 70 किलोग्राम तक होता है। अपने आकार में इतनी बड़ी होने के कारण यह एक समय में एक बड़ी भैंस का शिकार कर सकती है। कई बार इनके इन्सानों पर हमले करने की बात भी सामने आई है। कोमोडो ड्रैगन एक सरीसृप प्रकार का जीव है तथा इसका वैज्ञानिक नाम Varanus Komodoensis है।

रहने का स्थान

कोमोडो ड्रैगन इंडोनेशिया के चार द्वीपों कोमोडो, रींका, फ्लोरस व गिली मोटांग में पाए जाते है। कोमोडो ड्रैगन के रहने का सबसे पसंदीदा क्षेत्र गर्म और शुष्क क्षेत्र है। इनके रहने का स्थान कम ऊंचा, सूखा और उष्णकटिबंधीय घास के मैदान है। कोमोडो ड्रैगन दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहते है।

शारीरिक बनावट

कोमोडो ड्रैगन देखने में जितना विशालकाय है उससे कहीं ज्यादा खतरनाक भी है। शारीरिक बनावट की बात करें तो इसके पास कान की सिर्फ एक हड्डी होती है। जिससे इनके सुनने की क्षमता बहुत कम होती है। शुरुआत में इन्हें बहरा माना जाता था। लेकिन लगातार इन पर हो रहे शौध से पता चला की इनके सुनने की क्षमता 400-2000 हर्ट्ज होती है। जबकि मनुष्यों के सुनने की क्षमता 20-20000 हर्ट्ज के मध्य होती है।

कोमोडो ड्रैगन 300 मीटर यानि 1000 फीट की दूरी तक देख सकते है। रात्री के समय इनके देखने की क्षमता कम हो जाती है। इनमें रंगो की पहचान करने की क्षमता होती है लेकिन यह उतनी कारगर नहीं है।

दूसरे सरीसृपों की तरह यह अपनी जीभ का उपयोग स्वाद, गंध और वस्तुओं को पहचानने के लिए करता है। कोमोडो ड्रैगन की एक लंबी, पीली, गहरी और काँटेदार जीभ होती है जो आगे से फटी हुई होती है। अपनी जीभ को यह लगातार अपने मुंह से बाहर निकलती रहती है। जिससे इसे अपने शिकार का पता आसानी से चल जाता है।

इनकी गर्दन को एक दिशा से दूसरी दिशा की तरफ हिलाते हुए चलने की आदत होती है। जिस कारण यह विशालकाय छिपकली हवा का रुख अनुकूल होने पर 4-9.5 किमी. दूर तक की गंध को सूंघ लेती है। जिससे यह अपने शिकार को मीलों दूर से पहचान लेती है।

इसका एक विशाल जबड़ा होता है जिसमें बहुत ही नुकीले और जहरीले दाँत होते है। एक बार कोई भी इसके जबड़े में आ जाए तो फिर उसका निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इनके दाँतो की लंबाई 1 इंच तक होती है। इसकी लार सदा खून से भरी रहती है जिस कारण बाहर से देखने पर इसका मुंह हमें लाल दिखाई देता है।

इसके पंजे बहुत ही नुकीले और मजबूत होते है, जो इसे शिकार करते समय दौड़ने और शिकार को काबू करने के काम आते है। प्रजनन काल में कोमोडो ड्रैगन जमीन में अंडे देते है, उस समय जमीन खोदने में यह इन पंजों की सहायता लेते है। इनकी चमड़ी बहुत सख्त होती है। इसके इतने विशालकाय शरीर के कारण ही इसे दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली कहा जाता है।

आहार

कोमोडो ड्रैगन एक मांसाहारी जीव है। भैंस, हिरण, सूअर इनका पसंदीदा शिकार है। शिकार करने की इनकी एक अनूठी तरकीब होती है। कोमोडो ड्रैगन शिकार घात लगाकर करते है। मिट्टी रंग के होने के कारण यह जमीन पर आसानी से छिप सक है। जब कोई भी शिकार इनके पास से निकलता है तो यह झट से उसको दबोच लेते है। फिर शिकार का इसके मजबूत जबड़ों से निकलना मुश्किल हो जाता है।

कई बार जब शिकार इनके जबड़ों में नहीं आ पाता है, तो यह उसको काटकर घायल कर देते है। चूंकि कोमोडो ड्रैगन के जबड़ें विषैले होते है, इस कारण घायल जानवर की कुछ ही दिन में मौत हो जाती है। कोमोडो ड्रैगन घायल जानवर की मौत तक उसका पीछा करते है और मरने के बाद उसे बहुत बेरहमी से टुकड़ों में बांटकर खाते है।

कोई भी जानवर घायल होने के बाद इनसे बच नहीं पाता है, क्योंकि इनके सूंघने की क्षमता 5-9 किलोमीटर तक होती है। कोमोडो ड्रैगन को सड़ा हुआ माँस खाना ज्यादा पसंद है। इसलिए कई बार यह अपने शिकार को सड़ने के लिए छोड़ देते है और बाद में उसे खाते है।

अंडे देने का समय

अन्य स्तनधारियों की तरह कोमोडोज भी अंडे देते है। इनके प्रजनन करने का समय मई से अगस्त तक होता है। अपनी पसंदीदा मादा कोमोडो के साथ संभोग करने के लिए नर कोमोडोज आपस में लड़ते है। जीतने वाला ही मादा कोमोडो के साथ संभोग करता है। कोमोडो ड्रैगन सितंबर महीने में अंडे देते है। एक बार में यह लगभग 20 अंडे देते है।

शुरुआत में कोमोडो ड्रैगन के बच्चे बहुत कमजोर होते है इसलिए इन्हें दूसरे शिकारियों से खतरा बना रहता है। अपनी ज़िंदगी के पहले 9 साल तक यह पेड़ों में रहकर अपने आप को मजबूत बनाते है। इनकी अधिकतम आयु 30 वर्ष तक होती है। तो यह है दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली जो अपने नाम के अनुरूप विशालकाय और खतरनाक है।

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