आइए जानते हैं इतने विशाल ब्रह्मांड में मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई?

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ब्रह्मांड में मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई?

इस धरती का सबसे बुद्धिमान जीव मनुष्य आज अपनी उत्पत्ति को लेकर उलझा हुआ है। इन्सानों की सोचने और करने की दृढ़ इच्छा ने कुछ हद तक इस उलझन को सुलझाने में सहायता की है। वर्षों की वैज्ञानिक खोज और कड़ी मेहनत ने आज मनुष्य की उत्पत्ति को सरल रूप में प्रदर्शित किया है। तो जानते हैं ब्रह्मांड में मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई?

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मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई?

मनुष्य की उत्पत्ति के बारे में 3 सिद्धांत मुख्य रूप से काम करते है। जो धार्मिक, वैज्ञानिक और एलियन सिद्धांत के रूप में जाने जाते हैं। ये तीनों सिद्धांत कहीं न कहीं हमारे अनेक सवालों के जवाब देते हैं। आज का आधुनिक युग, वैज्ञानिक युग होने के कारण ज्यादार लोग वैज्ञानिक सिद्धांत को महत्व देते है। तो आइए पता करते हैं कि यह तीनों सिद्धांत मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई, सवाल का जवाब अच्छे से देते हैं।

धार्मिक सिद्धांत

धर्म और विज्ञान की कभी एक सोच नहीं हो सकती। दुनिया में जीतने लोग विज्ञान को मानते हैं, उतने ही धर्म को। इसलिए मनुष्य की उत्पत्ति के बारे में धार्मिक महत्वता भी अपना एक स्थान रखती है। अलग-अलग धर्मों में इसको लेकर अलग-अलग मान्यता हैं। जिन्हें हम ध्यान से समझने की कोशिश करते हैं।

हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म में मनुष्य को ब्रह्मा कि संतान बताई गई है। पौराणिक ग्रन्थों में कहा गया है कि ब्रह्मा ने ही इस संसार में मनुष्य की उत्पत्ति की है। हम सभी ब्रह्मा की ही संतान है। हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य का शरीर पाँच तत्वों वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश से मिलकर बना है। हालांकि आज के वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं, कि मनुष्य का शरीर इन पाँच तत्वों से मिलकर बना है।

एक पौराणिक किताब “दिव्य जीवन” में मानव की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार सर्वप्रथम ब्रह्म से आत्मा और आत्मा से इस संसार की उत्पत्ति हुई। धरती के शुरुआती काल में चारों ओर पानी ही पानी था। यह जल आत्मा का ही एक स्वरूप था और इसी जल में जीवन की उत्पत्ति हुई।

इसके अलावा ब्रह्म से आत्मा के अलावा ब्रह्मा की भी उत्पत्ति हुई। फिर ब्रह्मा ने अपने आप को 2 भागों में विभक्त कर लिया। जिसमें से एक भाग पुरुष और दूसरा भाग स्त्री बना। पुरुष का नाम स्वायंभुव मनु और स्त्री का नाम शतरूपा हुआ। कहते हैं कि मनु से ही मानव शब्द की उत्पत्ति हुई। हम सभी मनु और शतरूपा की संताने हैं।

ईसाई धर्म

ईसाई धर्म के धर्म ग्रंथ बाइबल में मनुष्य की उत्पत्ति को विस्तार से समझाया गया है। बाइबल के प्रथम ग्रंथ का नाम भी उत्पत्ति रखा गया है, ताकि इसमें मनुष्य के जन्म के बारे में अच्छे से समझा पाएँ। बाइबल के अनुसार इस संसार में सिर्फ एक ईश्वर है जिसने इस सृष्टि को बनाया है। उसने ही हम इन्सानों को जन्म दिया और हमारे वजूद को आगे बढ़ाया।

बाइबल के अनुसार सर्वप्रथम ईश्वर ने धरती पर सुंदर-सुंदर बगीचों, पेड़-पौधों, जानवरों आदि की रचना की। कुछ समय बाद ईश्वर को अनुभव हुआ कि इन सब का ख्याल रखने के लिए एक बुद्धिमान जीव का होना जरूरी है। ईश्वर ने बहुत सोच-समझकर एक ऐसी आकृति का जीव बनाया जो बिल्कुल इंसान जैसा था। उसे एडम नाम दिया गया।

अब एडम उन जीवों, बगीचों का अच्छे से ख्याल रखने लग गया। लेकिन फिर उसे एक साथी की कमी महसूस हुई जो बिल्कुल उसके जैसा हो। उसने जब ईश्वर से अपनी व्यथा सुनाई तो ईश्वर ने एक स्त्री का निर्माण किया। जिसका नाम ‘ईव’ हुआ। फिर इन्हीं दोनों ने मिलकर मनुष्य जाती को आगे बढ़ाया और यह दुनिया के पहले मानव कहलाए।

वैज्ञानिक सिद्धांत

वैज्ञानिक सिद्धांत कुछ हद तक आज के मनुष्य की रूपरेखा समझाने में कारगर सिद्ध होता है।

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