तो यह है सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल, जिससे आप लाखों कमा सकते है।

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सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल

भारत की आधी से ज्यादा जनसंख्या गांवों में निवास करती है। ग्रामीण लोग अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। जिस कारण गांवों में रहने वाले ज़्यादातर लोग आपको खेती करते हुए मिलेंगे। इसी कारण भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। देश की लगभग अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है। इसी कारण आज सरकार भी कृषि को बढ़ावा देने ले लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। लेकिन हमें भी ज्यादा कमाई वाली फसल के बारे में जानकारी होनी चाहिए। ताकि हम खेती से एक अच्छा मुनाफा कमा सके।

इस आर्टिक्ल में हम सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल के बारे में जानेंगे। जो किसान लगातार पारंपरिक खेती कर रहे है, लेकिन उन्हे मुनाफा नहीं हो रहा है। तो उनके लिए यह खेती एक वरदान साबित हो सकती है। तो आइए जानते है वो फसल कौनसी है जो आपको कुछ ही दिनों में मालामाल बना सकती है।

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सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल का नाम

तो इस फसल का नाम है, तुलसी की फसल  या तुलसी की खेती। वैसे तुलसी का धार्मिक महत्व भी है। हिन्दू धर्म में तुलसी को सबसे पवित्र पौधा माना जाता है। हिन्दू रीति-रिवाजों में तुलसी की पूजा-अर्चना की जाती है। आपको हर घर में एक तुलसी का पौधा जरूर मिलेगा। आयुर्वेद में तुलसी एक औषधि के रूप में उपयोग में ली जाती है।

2022 तक तुलसी के कारोबार में 1000 करोड़ रुपए की वृद्धि होने वाली है। अब आप अंदाजा लगा सकते है कि भविष्य में तुलसी की भारी-भरकम मांग होने वाली है। इसे देखते हुए नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (एनएमपीबी) ने तुलसी की खेती पर किसानों को 20 फीसदी सब्सिडी देने की योजना बनाई है।

लागत कितनी आती है?

तुलसी की खेती में लागत बहुत कम आती है। इसके लिए एक हेक्टेयर जमीन में 1 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। जिसकी कीमत बाजार में 1,000 रुपए तक है। इसके अलावा इसमें 5,000 रुपए तक की खाद और कीटनाशक की आवश्यकता पड़ेगी। फसल तैयार होने के बाद आपको कटाई और कढ़ाई में 4000 रुपए तक का खर्चा आ सकता है। इस प्रकार एक हेक्टेयर में 10000 रुपए की लागत से एक बार के लिए फसल तैयार हो जाती है।

मुनाफा कितना है?

तुलसी के तेल की कीमत 800 रुपए/किलोग्राम के लगभग है। तुलसी का उत्पादन एक बार में प्रति हेक्टेयर 5,000 किलोग्राम तक होता है। जिससे आप 150 किलोग्राम तक तेल का उत्पादन कर सकते है। यानी एक हेक्टेयर में तकरीबन 1,20,000 रुपए तक के तेल का उत्पादन कर सकते है। 10,000 रुपए खर्चा और 1,20,000 के उत्पादन से एक बार में 1,10,000 रुपए तक कमाया जा सकता है। तथा इसकी 1 साल में 3 फसल ली जा सकती है। कुल मिलाकर आप एक साल में 1 हेक्टेयर से 3,00,000 रुपए का शुद्ध मुनाफा कमा सकते है।

तुलसी की खेती के लिए जलवायु कैसी होनी चाहिए?

तुलसी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और कटिबंधीय दोनों तरह कि जलवायु सही बैठती है। लेकिन ज्यादा सर्दी में इसका पौधा अपना विकास अच्छे से नहीं कर पाता है। थोड़ा हल्का गरम मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त है। इसके अलावा ज्यादा बरसात भी इसके पौधे को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाती है। इसके इन्हीं गुणों के कारण इसकी खेती भारत के हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।

मिट्टी कैसी होनी चाहिए?

वैसे तो यह हर प्रकार कि उपजाऊ मिट्टी में बोई जा सकती है। लेकिन बलुई और दोमट्ट मिट्टी इसके लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी है। तुलसी की खेती के लिए सबसे पहले जमीन को समतल किया जाता है, ताकि उसमें क्यारियाँ अच्छे से बन जाए। इन क्यारियों को बहुत ही सावधानी से बनाना चाहिए ताकि बरसात का पानी इनमें खड़ा न रहें।

क्यारियाँ बनाने के बाद अब आप इसमें गोबर की खाद मिला दीजिए। चूंकि तुलसी औषधी के रूप में ली जाती है, तो इसका शुद्ध होना बहुत जरूरी है। अगर आप गोबर की खाद नहीं मिला सकते है, तो आप रसायनिक उर्वरक भी मिला सकते है। लेकिन इससे आपकी जमीन को बहुत नुकसान होता है।

पौधा कैसे तैयार करें?

तुलसी के पौधे कि रोपाई की जाती है, इसलिए सबसे पहले इसके पौधे को रोपाई के लिए तैयार करना पड़ता है। जैसे चावल के पौधे तैयार किए जाते है। सबसे पहले 15X10 फीट की एक नर्सरी तैयार करनी होती है। उसमें छोटी-छोटी क्यारियाँ तैयार करके उनमें उपयुक्त गोबर की खाद और रासायनिक खाद मिलाई जाती है। उसके बाद तुलसी के बीजों को इसमें बोया जाता है। 10 दिनों के अंदर पौधा अंकुरित हो जाता है। तथा 30-35 दिन बाद पौधा रोपाई के लिए अपना उपयुक्त विकास कर लेता है। अप्रैल महीने में इसकी पंजीरी को तैयार करना सबसे उत्तम होता है।

रोपाई कैसे करें?

तुलसी के पौधों की रोपाई के लिए जुलाई महिना सबसे उत्तम माना गया है। रोपाई करने के लिए आपको सबसे पहले समतल भूमि पर क्यारियाँ तैयार करनी पड़ती है। उसके बाद 40 सेमी. की दूरी पर पौधों की रोपाई की जाती है। तथा एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति के बीच 40 सेमी. का अंतराल होना बहुत जरूरी है। रोपाई करने के बाद 1 बार सिंचाई जरूर करनी चाहिए। तथा पूरी फसल तैयार होने तक इसमें 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। वैसे तुलसी की फसल को बरसात की फसल कहा जाता है।

खरपतवार और कीड़े का रखें ध्यान

खरपतवार एक ऐसी समस्या है जो किसी भी फसल को बर्बाद कर सकती है। इसलिए पहली सिंचाई के बाद से ही खरपतवार पर नियंत्रण रखना शुरू कर देना चाहिए। तुलसी के पौधे को मौसमी बीमारियों और कीड़ों से बचाने के एक अच्छे कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए। आपको बाज़ार में कीटनाशक की दवाइयाँ मिल जाएगी, लेकिन आप किसी एक्सपर्ट की सहायता जरूर लीजिएगा।

तुलसी की फसल की कटाई कैस करें?

रोपाई के 10-12 सप्ताह बाद तुलसी का पौधा नीचे से पीला पड़ने लगता है। इसके साथ ही इसके फूल भी पक्के हुए से नजर आने लगते है। इस स्थिती में तुलसी की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। अब जमीन से 20 सेमी. ऊपर पौधे को काटा जाता है। ताकि एक बार कटने के बाद पौधे पर नई शाखाएँ आ जाएँ और कुछ ही दिनों में एक नया पौधा बनकर तैयार हो जाता है। जिससे एक साल में 3-4 फसल लेना आसान हो जाता है।

कटाई के बाद क्या करें?

कटाई के बाद इसके पतों को सुखाया जाता है और आसवन विधि से तेल प्राप्त किया जाता है। तेल निकालने से पहले इसकी पतियों को धूप में सुखाया जाता है। बाद में इसी तेल को बाज़ार में बेचा जाता है। जहां इसके तेल की कीमत 800 रुपए तक होती है। अलग-अलग मंडियों में इसके तेल की कीमत अलग-अलग है। कटाई के तुरंत बाद तेल नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि इससे इसकी गुणवता में कमी आ जाती है।

तो आप बहुत ही कम खर्चें में तुलसी की खेती से अच्छी कमाई कर सकते है। तो यह है भारत में सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल, जो आपको कुछ ही समय में मालामाल कर सकती है। कम खर्चीली होने के कारण कोई भी किसान इस फसल का उत्पादन कर सकता है। तुलसी का उपयोग एक औषधि के रूप में होता है, इसलिए आने वाले समय में इसकी मांग और भी ज्यादा बढ़ने वाली है।

फिलहाल इसकी खेती बहुत ही कम किसान करते है, जिस कारण ज़्यादातर किसान इसके बारे में जानते नहीं है। आपको यह सबसे ज्यादा कमाई वाली फसल एक अच्छा मुनाफा दे सकती है। अगर आपको पारंपरिक खेती से मुनाफा नहीं हो रहा है, तो आपको एक बार तुलसी की खेती जरूर करनी चाहिए।

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