कैमरे की खोज किसने की थी॥ Camera Ki Khoj Kisne Ki Thi?

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कैमरे की खोज किसने की थी?

Camera Ki Khoj Kisne Ki- फोटोग्राफी ने इंसान के जीवन को काफी रोमांचक बना दिया है। जीवन के खूबसूरत पलों को हमेशा के लिए कौन नहीं सँजोकर रखना चाहता। यह सिर्फ फोटोग्राफी के कारण ही संभव हो पाया है। वर्तमान समय में कैमरा जीवन का एक अभिन्न अंग बना गया है, खासकर मोबाइल कैमरा।

इसके अलावा कैमरा से होने वाली वीडियो रिकॉर्डिंग भी इन्सानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई है। CCTV कैमरा सुरक्षा और चौकसी के लिहाज से अब सबसे महत्वपूर्ण यंत्र बन गया है। आजकल छोटे-छोटे कैमरा भी प्रचलन में है, जिनको कहीं पर भी फिट किया जा सकता है। इस तरह से हम कह सकते हैं कि आज बिना कैमरा के हमारा जीवन अधूरा है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैमरा का आविष्कार या कैमरे की खोज किसने की थी? तो आइए आज हम आपको कैमरा के इतिहास से संबधित कुछ जानकारी देते हैं। जिसमें हम बताएँगे की कैमरा का आविष्कार या कैमरे की खोज किसने की थी? तो आइए शुरू करने से पहले जानते हैं कि कैमरा क्या है?

कैमरा क्या है?

कैमरा के इतिहास को जानने से पहले हम इसके बारे में जान लेते हैं कि आखिर यह है क्या? सरल शब्दों में कहे तो कैमरा एक ऐसा उपकरण है, जिसका उपयोग फोटोग्राफी के लिए किया जाता है। जिन लोगों में फोटोग्राफी की कला है, उनके लिए यह एक वरदान है। फोटोग्राफी ग्रीक शब्द “फोटो” से आया है जिसका अर्थ है प्रकाश, और “ग्राफीन” जिसका अर्थ है “आकर्षित करना”।

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फोटोग्राफी के इतिहास में इस शब्द का पहली बार इस्तेमाल सर जॉन एफ.डब्ल्यू. हर्शल ने 1839 में किया था। एक कैमरा फोटो लेने के लिए किसी भी वस्तु के प्रकाश को कैप्चर करता है। इस प्रक्रिया के दौरान वह उस संवेदनशील वस्तु के एक्शन और radiation को capture कर किसी भी इमेज को रिकॉर्ड करता है।

इन सभी क्रियाओं के लिए एक कैमरा लेंस, दर्पण, अपने स्वयं के प्रकाश स्रोत और मीडिया का उपयोग करता है। मीडिया मेमोरी को कहा जाता है, जहां पर क्लिक की गई फोटो को सेव किया जाता है। तो अब हम जानते हैं, कि कैमरा क्या है? आइए कैमरे के इतिहास को और अधिक विस्तार से जानें।

कैमरा का इतिहास

कैमरा का इतिहास अन्य वैज्ञानिक उपकरणों की तरह काफी रोमांचक है। हालाँकि यह हमारे पूर्वजों की ही देन है, क्योंकि आज से तकरीबन 2500 वर्ष पहले इसकी नींव रखी गई थी। सबसे पहले फोटोग्राफी के लिए Camera Obscura का इस्तेमाल होता था, जिसका इतिहास काफी पुराना है।

Camera Obscura

Camera Obscura एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है- ‘अँधेरा कमरा।’ यह एक बॉक्स या बड़े कमरे के आकार की डिवाइस है, जिसमें एक छोटा सा छेद होता है। फिर इसके सामने एक वस्तु को रखा जाता है, और उस पर प्रकाश को बिखेरा जाता है। फिर वो प्रकाश की किरणें उस वस्तु से परावर्तित होकर छेद में से गुजरती है।

परिणामस्वरूप उस बॉक्स के अंदर एक इमेज बनती है, जो उल्टी होती है। मतलब उसका नीचे वाला हिस्सा, ऊपर और ऊपर वाला हिस्सा, नीचे होता है। लेकिन बाद में दर्पण की मदद से इस समस्या को दूर किया गया। वक्त के साथ उनमें लेंस का भी उपयोग होने लगा। Camera obscura का उपयोग ड्राइंग और एंटरटेनमेंट के लिए किया जाता था।

Camera obscura बहुत पुराना डिवाइस है। इसका सबसे पुराना उल्लेख 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान, चीनी दार्शनिक और मोहवाद के संस्थापक मोजी द्वारा किया गया था। उन्होंने इस बात पर नोटिस किया कि Camera Obscura से क्लिक की गई इमेज ऊपर से नीचे और दाएँ से बाएँ तरफ बनी थी।

इसके बाद ग्रीक दार्शनिक अरस्तू ने चौथी शताब्दी में इस बात पर गौर किया कि, सूर्य ग्रहण के समय प्रकाश पत्तियों के बीच में से गुजरता है। तो वह जमीन पर ग्रहण लगे सूर्य की तस्वीर बनाता है। इसके अलावा सीधी रेखा में प्रकाश गुजरने की घटना यूक्लिड ने चौथी शताब्दी ईसा पूर्व और अलेक्जेंड्रिया के थियोन ने चौथी शताब्दी ईस्वी में नोटिस की थी।

Tralles के Anthemius ने 6वीं शताब्दी में हागिया सोफिया को डिजाइन किया था। यह एक प्रकार से Camera Obscura का ही एक प्रकार था। इसी क्रम में Al-Kindi एक अरब दार्शनिक, गणितज्ञ, चिकित्सक और संगीतकार ने 9वीं शताब्दी में प्रकाश और एक पिनहॉल के साथ प्रयोग किए, जिसमें उन्होंने प्रकाश के behaviour को लोगों के सामने रखा।

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इन सभी ने एक छोटे से छेद और प्रकाश के साथ प्रयोग किए, लेकिन किसी ने इस बात का सुझाव नहीं दिया कि इसमें एक स्क्रीन का भी उपयोग किया जा सकता है। ताकि हॉल से निकलकर प्रकाश दीवार की बजाय स्क्रीन पर गिरे। इससे इमेज बनाने में आसानी होगी, क्योंकि एक दीवार की बजाय स्क्रीन को कहीं पर भी ले जाया जा सकता था।

ऐसा करने वाला पहला व्यक्ति 11वीं शताब्दी में अल्हाज़ेन (इब्न अल-हेथम के नाम से भी जाना जाता था) था। वह एक वैज्ञानिक, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और दार्शनिक भी थे, उन्होंने प्रकाशिकी (Optics) की पुस्तक लिखी और इन सब के अलावा, उन्होंने Camera obscura और पिनहोल कैमरा का आविष्कार भी किया था।

लगभग इसी समय, चीनी वैज्ञानिक शेन कू ने एक Camera obscura के साथ एक्सपरिमेंट किया। उन्होंने इसे ज्यामितीय रूप से वर्णित किया और यहां तक ​​​​कि इसका इस्तेमाल कुछ प्रभावों की व्याख्या करने के लिए भी किया, जिसका उल्लेख कुछ सदियों पहले किया गया था। जैसा कि अंग्रेजी दार्शनिक रोजर बेकन द्वारा वर्णित है, 13वीं शताब्दी में सूर्य ग्रहण को समझने के लिए Camera obscura का उपयोग किया गया था।

अर्नाल्डस डी विला नोवा (Arnaldus de Villa Nova), एक कीमियागर, ज्योतिषी और चिकित्सक ने मनोरंजन के लिए प्रोजेक्टर के रूप में एक Camera obscura का इस्तेमाल किया था। कलाकारों ने कैमरा ऑब्स्कुरा का इस्तेमाल 15वीं सदी में शुरू किया था। लियोनार्डो दा विंची अपने “कोडेक्स अटलांटिकस” में Camera obscura के बारे में बात करते हैं, जो उनके चित्र और लेखन का एक बारह-खंड वाला सेट है जहां उन्होंने उड़ने वाली मशीनों, हथियारों और संगीत वाद्ययंत्रों के बारे में भी बात की थी।

Giambattista della Porta, इतालवी विद्वान ने उस स्थान पर एक लेंस जोड़कर Camera obscura में सुधार किया, जहां प्रकाश बॉक्स में प्रवेश करता है। उन्होंने यह समझाने के लिए कैमरा ऑब्स्कुरा का भी इस्तेमाल किया कि मानव आँख कैसे काम करती है। जर्मन खगोलशास्त्री जोहान्स केप्लर 1604 में इतिहास में पहली बार “कैमरा ऑब्स्कुरा” शब्द का उपयोग किया था।

“ओकुलस आर्टिफिशियल टेलीडिओप्ट्रिकस सिव टेलीस्कोपियम” के लेखक जोहान ज़ैन ने 17 वीं शताब्दी में अपनी पुस्तक में कैमरा ऑब्स्कुरा और अन्य ऑप्टिकल उपकरणों के बारे में लिखा है। 18 वीं शताब्दी में कोंटे फ्रांसेस्को अल्गारोटी ने अपनी पुस्तक “सगियो सोप्रा पिट्टुरा” लिखी और पेंटिंग में कैमरा ओबक्यूरा (या वह इसे “कैमरा ओटिका” (“ऑप्टिक चैम्बर”) कहते हैं) के उपयोग के लिए एक पूरा अध्याय लिखा था।

शुरुआती मॉडल बड़े थे और इसमें एक कमरा या एक तम्बू शामिल हुआ करता था (जोहान्स केप्लर ने एक तम्बू का इस्तेमाल किया था।) बाद में और अधिक पोर्टेबल रूपों का आविष्कार किया गया था। वे लकड़ी के बक्से थे जिनमें पिनहोल के बजाय एक लेंस होता था, जिसे फोकस प्रदान करने के लिए स्थानांतरित किया जा सकता था। उनके पास एक दर्पण भी था जो छवि को घुमाता था और एक स्क्रीन जिस पर इमेज बनती थी। ये कैमरे शुरुआती फोटोग्राफिक कैमरों के आधार थे।

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कैमरे की खोज किसने की थी?

पहला पोर्टेबल कैमरा Johann Zahn द्वारा 1685 में डिजाइन किया गया था। इसलिए कैमरे के आविष्कार या खोज का श्रेय Johann Zahn को दिया जाता है। लगभग 130 वर्षों के बाद तक कैमरे के विकास में बहुत अधिक प्रगति नहीं हुई थी। बीच-बीच में कैमरे बनाने की ज्यादातर कोशिशें नाकाम रहीं।

लेकिन 1814 में Joseph Nicephore Niepce ने एक फोटो क्लिक कर सनसनी मचा दी थी। इस तरह से पहले कैमरे के आविष्कार का श्रेय Johann Zahn और Joseph Nicephore Niepce के बीच साझा किया गया है। नाइसफोर द्वारा ली गई तस्वीर स्थायी नहीं थी। इसे सिल्वर क्लोराइड से लेपित एक कागज पर कैमरे का उपयोग करके लिया गया था। इमेज का जो हिस्सा कागज पर प्रकाश के संपर्क में नहीं आया, वो पूरी तरह से काला-काला हो गया।

Louis Daguerre को 1829 में पहली बार व्यावहारिक फोटोग्राफी का आविष्कार करने का श्रेय दिया जाता है। फोटोग्राफी के लिए एक प्रभावी विधि को लाने के प्रयास में Daguerre को एक दशक से अधिक समय लगा। Daguerre ने जो प्रगति की वह नीसफोर के साथ मिलकर की थी।

इसके बाद Daguerre ने फोटोग्राफी के स्वामित्व अधिकार फ़्रांसीसी सरकार को बेच दिए, जिसके बदले में देश के विभिन्न हिस्सों में daquereo प्रकार के स्टूडियो विकसित करने की ज़िम्मेदारी ली। एलेक्जेंडर वालकॉट ने पहले कैमरे का आविष्कार किया था जो ऐसे फोटो तैयार करता था, जो जल्दी से फीके नहीं पड़ते थे।

निष्कर्ष

तो दोस्तों यह था आज का हमारा आर्टिक्ल कैमरे की खोज किसने की थी (camera ki khoj kisne ki)? जिसमें हमने जाना कि अन्य आविष्कारों की तरह इसमें भी आविष्कार का श्रेय एक व्यक्ति को देना गलत है। यह तो सदियों से चली आ रही एक तकनीक थी, जिसे हमने समझकर इसमें काफी बदलाव किए।

वक्त के साथ इन बदलावों ने इस कैमरे को काफी आधुनिक बना दिया। परिणामस्वरूप हम आज चारों तरफ कैमरा से घीरे हुए हैं। कैमरे की खोज किसने की थी (camera ki khoj kisne ki)? आर्टिक्ल अगर आपको पसंद आया है, तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

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