सबसे हल्की धातु कौन सी है ॥ Sabse halki dhatu kaun si hai

सबसे हल्की धातु कौन सी है?

Sabse halki dhatu kaun si hai?- जब धातु की बात आती है, तो हमारे दिमाग में एक भारी और कठोर वस्तु की तस्वीर बनती है। जिसे सोचकर लगता है कि इनका वजन काफी ज्यादा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं इस धरती पर कुछ ऐसी भी धातुएँ हैं, जो हवा से भी ज्यादा हल्की है।

आपने अगर कभी साइन्स पढ़ी है, तो आप धातुओं के बारे में जरूर जानते होंगे। हमारे आस-पास मौजूद लोहा भी एक धातु है। इस तरह से सभी धातु ठोस अवस्था में पाए जाते हैं, लेकिन इसका एक सबसे बड़ा अपवाद पारा है। जो द्रव अवस्था में पाया जाता है।

आज के इस आर्टिक्ल में हम सबसे हल्की धातु कौन सी है (sabse halki dhatu kaun si hai)? के बारे में विस्तार से जानेंगे। लेकिन इससे पहले हम जानते हैं कि आखिर धातु क्या है? तो आइए शुरू करते हैं।

हमारा सौरमंडल कैसा है?

धातु क्या है?

हमारी पृथ्वी पर पाए जाने वाले वे तत्व जो रसायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनते हैं, धातु कहलाते हैं। हमारे आसपास पाए जाने वाले लगभग सभी पदार्थ धातु से ही मिलकर बने होते हैं। जिसमें स्टील, लोहा, सिल्वर, एल्यूमिनियम, सोना, तांबा आदि एक प्रकार की धातु ही है।

वर्तमान समय में धातुओं का बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले तत्वों में से धातुओं का वर्गिकरण उनके गुणधर्मों के आधार पर किया जाता है। तत्वों के अलग-अलग गुणधर्म के अनुसार इन्हें अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। धातुओं के कुछ गुणधर्म इस प्रकार है-

गुणधर्म

  • धातु आघातवर्ध्य होते हैं। यानी इनको पीट-पीटकर पतली आकृति/चादर के रूप में ढाला जा सकता है।
  • इसके अलावा इनमें तन्यता का गुण भी पाया जाता है, जिसमें इन्हें खींचकर लंबा तार भी बनाया जा सकता है।
  • इस प्रकार के तत्व चमकदार होते हैं, यानी इनकी अपनी एक अलग चमक होती है।
  • सामान्य तौर पर कमरे के तापमान पर सभी धातुएँ कठोर होती है, लेकिन पारा इसका सबसे बड़ा अपवाद है। यह कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
  • धातुओं को पीटने पर यह एक ध्वनि निकालते हैं, जो बहुत तेज होती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारे स्कूल में लगी घंटी होती है।
  • धातुओं का घनत्व अत्यधिक उच्चा होता है।
  • यह विद्युत और ऊष्मा के सुचालक होते हैं।

इस तरह से आप इनके गुणों के हिसाब से पता लगा सकते हैं, की कौनसे तत्व धातु होते हैं। लेकिन इनमें से कुछ अपवाद भी होता हैं, जिनमें धातुओं के गुणों की कमी पाई जाती है।

अपवाद

  • पारा एक ऐसा धातु है जो कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
  • सोडियम धातु ठोस होने की बजाय कम नर्म होता है, जिसे चाकू से भी काटा जा सकता है।
  • गैलियम धातु त्वचा के स्पर्श से पिघल जाता है।
  • दूसरे धातुओं की तुलना में सोना और चाँदी में आघातवर्ध्यता और तन्यता का गुण पाया जाता है।
  • सोना, चाँदी, कॉपर और प्लेटिनम दूसरे धातुओं की तुलना में कम क्रियाशील होते हैं।

सबसे हल्की धातु कौन सी है (Sabse halki dhatu kaun si hai)?

सबसे हल्की धातु कौन सी है (sabse halki dhatu kaun si hai)?– सबसे हल्की धातु लिथियम है, जो एक शुद्ध तत्व है। इसका घनत्व 0.534 ग्राम/सेमी3 है। इसके इतने कम घनत्व के कारण या लिथियम को पानी से लगभग आधा घना बनाता है। इसलिए यदि लिथियम इतना प्रतिक्रियाशील नहीं होता, तो इसका एक हिस्सा पानी पर तैरता। मतलब लिथियम क्रियाशील धातु नहीं होती तो यह पानी पर तैरने में सक्षम होती।

दो अन्य धात्विक तत्व जो पानी से कम घने होते हैं। पोटेशियम का घनत्व 0.862 g/cm3 है जबकि सोडियम का घनत्व 0.971 g/cm3 है। आवर्त सारणी की अन्य सभी धातुएँ पानी से सघन हैं। यानी पोटेशियम और सोडियम पानी से हल्की होते हैं, जबकि अन्य धातु पानी से भरी होते हैं।

जबकि लिथियम, पोटेशियम और सोडियम सभी पानी पर तैरने के लिए पर्याप्त हल्के होते हैं, हालांकि ये अत्यधिक प्रतिक्रियाशील भी होते हैं। पानी में रखने पर ये जल या फट जाते हैं। वैसे सोडियम हवा के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेता है।

हाइड्रोजन सबसे हल्का तत्व है क्योंकि इसमें केवल एक प्रोटॉन और कभी-कभी एक न्यूट्रॉन (ड्यूटेरियम) होता है। कुछ शर्तों के तहत यह एक ठोस धातु बनाता है, जिसका घनत्व 0.0763 g/cm3 है। यह हाइड्रोजन को सबसे कम सघन धातु बनाता है, लेकिन इसे आमतौर पर “सबसे हल्के धातु” का दावेदार नहीं माना जाता है क्योंकि यह पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से धातु के रूप में मौजूद नहीं है।

लिथियम

आवर्त सारणी में 3 नंबर का तत्व यानी परमाणु संख्या 3 वाला तत्व लिथियम है। पृथ्वी पर पाया जाने वाला यह सबसे हल्का धातु (sabse halki dhatu kaun si hai)? है, जिसका बहुत जगह इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग विमान और कुछ बैटरियों के निर्माण में किया जाता है।

इसके अलावा इसका उपयोग mental health में भी किया जाता है। मानव को एक bipolar disorder की बीमारी होती है, जिसमें वह खुद को जंगली मानने लगता है। लिथियम इसी बीमारी से छुटकारा दिलाने में सहायता प्रदान करता है।

लिथियम के खोज की कहानी काफी रोमांचक है। रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (आरएससी) के अनुसार ब्राजील के एक प्रकृतिवादी जोज़े बोनिफेसियो डी एंड्राल्डा ई सिल्वा ने 1790 के दशक में स्वीडिश द्वीप यूटो पर खनिज पेटालाइट (LiAISi4O10) की खोज की थी। यह खनिज सफ़ेद और भूरे रंगा का होता है, लेकिन जब इसे आग में फेंका जाता है तो यह चमकीले लाल रंग का हो जाता है।

इसके बाद 1817 में, स्वीडिश रसायनज्ञ जोहान अगस्त अरफवेडसन ने पाया कि पेटालाइट में एक अज्ञात तत्व मौजूद। जोहान पूरी तरह से धातु को अलग करने में कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने इसके एक लवण को अलग कर दिया। लिथियम नाम “लिथोस” से आया है, जो किसी “पत्थर” के लिए ग्रीक शब्द है।

लेकिन लिथियम को पूरी तरह से अलग करने में 1855 ईस्वी तक का समय बीत गया। इस वर्ष ब्रिटिश रसायनज्ञ ऑगस्टस मैथिसेन और जर्मन रसायनज्ञ रॉबर्ट बन्सन ने लिथियम क्लोराइड में किसी तत्व का पता लगाने के लिए करंट प्रवाहित किया। इस तरह से लिथियम की खोज हुई।

भौतिक गुण

  • परमाणु संख्या (नाभिक में प्रोटॉन की संख्या): 3
  • परमाणु प्रतीक (तत्वों की आवर्त सारणी पर): Li
  • परमाणु भार (परमाणु का औसत द्रव्यमान): 6.941
  • घनत्व: 0.534 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
  • कमरे के तापमान पर अवस्था: ठोस
  • गलनांक: 356.9 डिग्री फ़ारेनहाइट (180.5 डिग्री सेल्सियस)
  • क्वथनांक: 2448 डिग्री फ़ारेनहाइट (1342 डिग्री सेल्सियस)
  • समस्थानिकों की संख्या (एक ही तत्व के परमाणु अलग-अलग संख्या में न्यूट्रॉन के साथ): 10; 2 स्टेबल
  • Most common समस्थानिक: Li-7 (92.41 प्रतिशत प्राकृतिक बहुतायत), Li-6 (7.59 प्रतिशत प्राकृतिक बहुतायत)

विशेष उपयोग

लिथियम कई मायनों में एक विशेष धातु है। यह हल्का और नरम है – इतना नरम कि इसे रसोई के चाकू से काटा जा सकता है। साथ ही इसका घनत्व इतना कम है कि यह पानी पर तैर सकता है। यह सभी धातुओं में सबसे कम गलनांक और उच्च क्वथनांक के साथ तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला पर भी ठोस है।

अपने साथी क्षार धातु की तरह सोडियम और लिथियम पानी के साथ दिखावटी रूप में प्रतिक्रिया करता है। Li और H2O का संयोजन लिथियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है, जो आमतौर पर लाल लौ में फट जाता है।

जेफरसन लैब के अनुसार लिथियम पृथ्वी की पपड़ी का मात्र 0.0007 प्रतिशत हिस्सा बनाता है, और यह केवल खनिजों और लवणों में पाया जाता है। उन लवणों में मस्तिष्क को बदलने की शक्ति होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार पुराने समय में लिथियम लवण उन्माद और अवसाद के इलाज के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा अनुमोदित पहली दवाएं थीं।

आज लिथियम कार्बोनेट वह यौगिक है जिसे अक्सर दवा के रूप में बेचा जाता है। कोई नहीं जानता कि लिथियम मूड को स्थिर करने के लिए कैसे काम करता है। उदाहरण के लिए, 2008 में शोधकर्ताओं ने जर्नल सेल में बताया कि लिथियम न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन के लिए एक रिसेप्टर की गतिविधि को बाधित करता है। जर्नल बायोलॉजिकल साइकियाट्री में 2011 के एक अध्ययन के अनुसार, यह मस्तिष्क को बड़ा करने में कारगर साबित हो सकता है।

कीड़े के साथ एक अध्ययन में, एमआईटी में जीवविज्ञानी ने पाया कि लिथियम कीड़े के मस्तिष्क में एक प्रमुख प्रोटीन को रोकता है, जिससे बचने के व्यवहार से जुड़े न्यूरॉन्स निष्क्रिय हो जाते हैं। अनिवार्य रूप से कीड़े ने उस प्रोटीन के बिना हानिकारक बैक्टीरिया से बचना बंद कर दिया।

इस तरह से शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि यह दिमाग को शांत करने में कारगर साबित हो सकता है।

निष्कर्ष

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वैसे दोस्तों लिथियम का उपयोग हमारे दिमाग के लिए किया जाता है, आपको शायद इसके बारे में पता नहीं होगा। अगर आपको यह यूनिक जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और रिशतेदारों के साथ शेयर करना न भूलें।

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